Wednesday, December 9, 2015

नो कार शेयरिंग।

-वीर विनोद छाबड़ा
ट्रैफिक/प्रदूषण कंट्रोल के मुद्दे पर हमारे कई मित्रों ने सीट शेयरिंग का सुझाव दिया। धन और ऊर्जा के साथ समय की भी बचत। हमें यह सुझाव बहुत अच्छा लगा।

साथ ही हमें याद आया कि मुद्दत पहले यह फार्मूला हम अपना चुके हैं। करीब आधा किलोमीटर पर हमारे एक घनिष्ट मित्र हैं। हम एक ही दफ़्तर में थे। रूम भी अगल-बगल। उनसे डील हुई। तीन कार्य दिवस उनकी कार और तीन कार्य दिवस हमारी। इसके अलावा ढेर नियम और कानून-कायदे तय हुए। टॉस हुआ। शुरुआत हमीं से हुई।
पहले दिन हम पहुंचे उनके घर। पता चला, भाई जान स्नान कर रहे हैं। उसके बाद आधा घंटा पूजा-पाठ किया और फिर आधा घंटा नाश्ता-पानी। साढ़े-ग्यारह बजे वो जैसे-तैसे सज-धज कर तैयार हुए। आईने में दायें-बायें होकर खुद को कुछ निहारा भी। 
इस बीच हम चिरौरी करते रहे कि भाई, जल्दी कर। मेरा बॉस बिगड़ रहा होगा। आज मेरी क्लास ले लेगा।
लेकिन मित्र यही कहते रहे - अमां, काहे की जल्दी है? तू दफ़्तर टाईम पर नहीं पहुंचेगा तो क्या बिजली बननी बंद हो जायेगी? ठीक है, अफ़सर है तू। लेकिन भूल मत, मूलतः बाबू है तू। देर से पहुंचना तेरे खून और स्वभाव में है।
और वही हुआ जिसका डर था। ज़िंदगी में पहली बार खूब डांट खाई बॉस से। ऐसा ही शाम को भी हुआ। हम देर तक रुकने वाले और वो शाम को पांच बजे मेमसाब के पीछे-पीछे साथ सब्जी का झोला लेकर चलने वाले। डील में निहित धारा के अनुसार हमने उनको पचास रूपए पकड़ाये - जा भाई, तू ऑटो से चला जा।
हम डील तोड़ भी नहीं सकते थे। नियम के मुताबिक़ छह कार्य दिवस से पहले किसी को किसी भी सूरत में मुक्ति नहीं मिल सकती।
दूसरे दिन मित्र काफ़ी सुधरे दिखे। मगर शाम को फिर हमारी जेब से पचास रूपए ढीले हो गए। देर से पहुंच कर पत्नी को नाराज़ करना उनकी फ़ितरत में नहीं था। तीसरे दिन भी हमें घाटा उठाना पड़ा।
चौथे दिन मित्र का नंबर लगा। निश्चित समय से वो पंद्रह मिनट पहले आ गए। हम नाश्ता कर रहे थे। हमारे साथ ही बैठ गए - तुम्हारे चक्कर में जल्दी निकलना पड़ा। नाश्ता भी नहीं कर पाया। 

रास्ते में पेट्रोल पंप दिखा। मित्र ने कार मोड़ दी उधर ही। हज़ार रूपए का पेट्रोल भरवाया। जब में हाथ डाला - अरे, बाप रे। जल्दबाज़ी में पर्स तो मैं घर ही भूल आया।
मरता क्या न करता। दिया हज़ार रूपया। हमें मालूम था कि इस हज़ार को वसूलने में महीनों लग जाएंगे। हो सकता है कुछ डिस्काउंट भी देना पड़े। 
जैसे तैसे छह दिन गुज़रे। हमने कान पकड़े। नो कार शेयरिंग। दुनिया में अकेले आये हैं, अकेले ही जायेंगे। 

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09-12-2015 mob 7505663626
D-2290 Indira Nagar 
Lucknow - 226016

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